शिवजी को धतूरा का फूल, बेलपत्र, भांग, दूध जैसी चीजें ही क्यों चढ़ाई जाती है?

भगवान शिव शंकर, जिनके हाथो में त्रिशूल, गले में सर्प, जाटा में माँ गंगा, जो हमेशा समाधी में लीन रहते है। जिन्हे भोलेनाथ, महेश्वर, विरूपाक्ष, शशिशेखर, जैसे कई नामो से पुकारा जाता है। सावन का महीना चल रहा है सोमवार के दिन लोग शिव जी की पूजा करता है। व्रत रखते है। लोग अपनी परेशानी को दूर करने के लिए मनोकामनाएं मांगते है। और सच्चे मन से उनकी आरधना करते है। शिव जी को दूध, जल से अभिषेक करते है। भांग और बेलपत्र चढ़ाया जाता है। लेकिन क्या आप जानते है। शिव जी को बेलपत्र, धतूरा, भांग जैसे चीजें क्यों चढ़ाई जाती है। तो आइये जाने इनके पीछे का कारण।

बेलपत्र जो शिव जी को अति प्रिय है। हमजब शिव जी की पूजा करते है तो बेलपत्र जरूर चढ़ाते है। फिर जल से अभिषेक करते है। बेल पत्र की तीन पत्तियों को हम हमेशा 1 गिनते है। तीनो पत्तियों में से एक को हम सत्व, दूसरा रज और त्तीसरा पत्ता तम के रूप में जाना जाता है। बेलपत्र को त्रिदेव, भगवान शंकर की तीन आंख का स्वरुप भी जाना जाता है। कहा जाता है की यदि हम पुरे साल या फिर कहे हमेशा शिवलिंग पे बेलपत्र चढ़ाएं और जल से अभिषेक करे तो शिव जी हमारी रास्ते में आने वाली हर बाधा को दूर करते है। बेलपत्र में विष को खत्म करने की सकती होती है।

एक पौराणिक कथा के अनुसार शिवलिंग पे बेलपत्र चढाने के पीछे की कथा यह की माता पार्वती के पसीने की बूंद जब मंदराचल पर्वत पे गिरी तो यह पसीने की बूंद एक बेलपत्र के पेड़ का रूप में जन्म ले लिया। यह बेलपत्र माता पार्वती के पसीने से उत्पन्न हुआ इसलिए इसे माता पार्वती के स्वरूप का रूप में माना जाने लगा। बेलपत्र पेड़ की जड़ो को गिरिजा का स्वरूप, पेड़ की तनो को माहेश्वरी, पेड़ की शाखाओ को दक्षिणायनी व पत्तियों को माता पार्वती का स्वरूप और पेड़ के फलो को कात्यायनी का स्वरूप माना जाता है। बेल पेड़ के फूलो में गौरी माता निवास करती है, इस प्रकार समस्त पेड़ में माँ लक्ष्मी निवास करती है। इसलिए बेलपत्र को माता पार्वती का स्वरूप माना जाता है। जो की शिवजी को अतिप्रिय है। इसे शिवलिंग पे चढ़ाने से शिव जी अतिप्रश्न होते है और भक्तो की मनोकामना पूरी करते है

दूसरी कथा के अनुसार कहा जाता है समुद्र मंथन के समय जब विष बहार आया तब देवताओ में हाहाकार मचने लगा। उस विष के प्रभाव से पूरी सृष्टि को बचाने के लिए भगवान शिव जी ने विष को अपने कंठ में धारण कर लिया और फिर विष के प्रभाव से उनका कंठ नीला हो गया। जिससे भगवान शिव जी बेहोश हो गये। और उनका शरीर विष के कारण गर्म हो गया। जिसका असर पुरे वातावरण में होने लगा। इस विष के प्रभाव को कम करने के लिए शिव जी पे जल डाला गया फिर बेल पत्र खिलाया गया। चुकि बेलपत्र विष के प्रभाव को कम करता है। इस प्रकार बेलपत्र और जल के प्रभाव से शिव जी ठीक हो गये। तब से शिव जी को बेलपत्र के साथ हमेशा जल चढ़ाया जाता है।

शिवलिंग पे दूध अर्पित करने का भी यही कारण है समुद्र मंथन के समय जो विष बाहर आया। उस विष को जब शिव जी ने अपने कंठ में धारण किया उससे उनका शरीर जलने लगा तब देवताओ ने उनपर जल चढ़ाना शुरू किया। पर उससे भी जलन दूर न हुई और विष का प्रभाव भी कम नहीं हो रहा था उनका शरीर जलन से तपने लगा शिव जी का कंठ नीला पड़ गया। तब शिव जी को दूध पिने का आग्रह किया गया। फिर शिव जी पे विष का असर कम होने लगा। तब से शिव जी को दूध भी अतिप्रिय हो गया। तभी से शिवलिंग पे दूध चढाने की प्रथा चालू हुई। और उन्हें नीलकंठ के नाम से पुकारा जाने लगा।

वैसे दूध शरीर के लिए पौष्टिक तत्व माना जाता है। इससे कई बीमारियां भी दूर होती है। इसमें कैल्शियम की मात्रा होती है। गाय का दूध सबसे ज्यादा शुद्ध माना जाता है। सावन के महीने में जब दूध शिवलिंग पे चढ़ाया जाता है। तो भक्तो की सारी कष्टे दूर हो जाती है। सोमवार के दिन दूध का दान करना बहुत ही शुभ माना जाता है।

धतूरा एक कांटेदार और सफ़ेद नील रंग का फुल होता है, जिसे कई बीमारियां भी ठीक होती है, महिलाओ को गर्भधारण करने में इसका उपयोग किया जाता है। धतूरा का फूल पूजा के रूप में भी उपयोग किया जाता है। धतूरा जो शिव को अतिप्रिय है।

भगवान शिव जी को प्रसन्न करने के लिए भक्त धतूरे के फूल से उनकी पूजा करते है। जब भगवान भोलेनाथ ने विष को अपने कंठ में धारण किया तब उनका कंठ नीला हो गया और इस विष के प्रभाव को कम करने के लिए देवताओ ने भांग, धतूरा, बेलपत्र जैसे जड़ी-बूटियों का प्रयोग किया। जो की शिव जी को अतिप्रिय है। तब से शिव जी को बेलपत्र, दूध, भांग, धतूरा चढ़ाया जाता है। शिवलिंग पे धतूरा के फूल अर्पित करने का कारण यह भी है की शिव जी उस कांटेदार जहरीले फूल को स्वीकार करके ये सन्देश देते है की हम अपने बुरे विचारो, कड़वाहट, किसी के प्रति गलत भावना न रखे अपनी मन को पवित्र रखे, शुद्ध रखे।