बालासन यानि चाइल्ड पोज़ यह योगआसन बहुत ही आसान और महत्वपूर्ण है जो हमारे शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद है। इस मुद्रा को कोई भी कर सकता है। इस योग आसान का लगातार हम अभ्यास करके अपने सरीर को स्वस्थ बना सकते है। यह आसन शरीर को लचीला और सुडोल बनाती है पाचन शक्ति अच्छी हो जाती है
बालासन शब्द का अर्थ है बच्चे की बैठने की मुद्रा, यहाँ पर बाला मतलब “बच्चा” वही पर आसान शब्द का अर्थ “बैठने की मुद्रा” से है। जब माँ के गर्भ में बच्चा होता है। तो उस समय बच्चा गर्भ में सिमटा हुआ रहता है उसी प्रकार जब हम इस योग अभ्यास को करते है तो हमारा शरीर भी एक गर्भ में पल रहे बच्चे के सामान हो जाता है। इस योग आसन से हमारे गर्दन, हाथ पैर, कमर, एड़ियां में अच्छे से स्ट्रेचिंग होती है।
बालासन एक ऐसा योग आसान है जिसे करने के बाद आप बहुत हल्का और शांत महसूस करंगे। और चित शांत प्रतीत होगा । इस मुद्रा को हम किसी भी योग अभ्यास के बाद आसानी से कर सकते है जब हमे बहुत थकान महसूस हो रही हो।
प्राचीन काल से हम देखते आ रहे है जो हमारे योगी, ऋषि मुनि इस असानो के प्रयोग दवारा अपने को मजबूत, ऊर्जावान बनाते थे। और साथ ही मानशिक शांति का अनुभव करते थे। इस लिए हम इस आर्टिकल में आपको बालासन की विधि, फायदे, इस आसान को कब और कैसे करे। इसकी जानकारी देंगे। जिसे करके आप भी स्वस्थ और ऊर्जावान महसूस करेंगे।
बालासन योग क्या है।
बालासन एक ऐसी योग पद्धति है जो हमारे शरीर के लिए तो फायदेमंद तो है ही साथ ही जिन्हे कमर दर्द, जोड़ो का दर्द, पीठ दर्द, आलास हो उन्हें भी दूर करता है। इस आसान को हमे कम से कम 3 से 4 मिनट करना चाहिए। बालासन में हम अपनी पुरे शरीर को जमीन की ओर दबाव डालते है। और अपने हाथ-पैरो और जांघो में खिचाव सा महसूस करते है। इस क्रिया से हमारे कमर, कंधो और गर्दन को मजबूती मिलती है। बालासन एक प्रकार की योग की मुद्रा होती है इस योग क्रिया में हमारा शरीर एक भ्रूण की भांति हो जाता है। जिससे हमे मानशिक शांति की अनुभूति होती है। इस क्रिया को हम तब कर सकते है जब हम योग अभ्यास करते हुए बहुत ही थकान महसूस करते है।
बालासन के फायदे
इससे हमारे शरीर के मांसपेशियों में खिचाव पैदा होती है जिससे हमे थकान से राहत मिलती है ।
कमर दर्द, पीठ के दर्द, रीढ़ की हड्डी का दर्द को दूर करने में सहायक है।
इस आसान से थकान, तनाव, चिंता कम करने में मदद करता है साथ ही हमे आंतरिक शांति की भी अनुभूति होती है।
बालासन करने से हमारे शरीर के माशपेशियों के साथ घुटनो में भी खिचाव होता है जिससे हमे घुटनो के दर्द में भी राहत मिलती है।
यह आसान शरीर के ब्लड सर्कुलेशन को ठीक करता है।
इस आसान से हमारे शरीर को ऊर्जा मिलती है। कार्यक्षमता बढ़ती है।
बालासन से रीढ़ की हड्डी में खिचवा होता है। जिसे हमे आराम महसूस होता है।
ये मुद्रा लम्बाई बढ़ने में मदद करती है।
इस मुद्रा से शरीर की मासंपेशियों को मजबूती मिलती है।
बालासन हमारे पुरे शरीर को आराम और मानशिक शांति देता है।

बालासन कब करे
इस आसान को आप कभी भी कर सकते है, या फिर किसी भी आसान के बीच में या जब आप कोई आसान करने के बाद बहुत थकान महसूस कर रहे हो, पसीना निकल रहा हो, सांसे तेज गति से चल रही हो तब आप अपने शरीर को आराम देने के लिए इस मुद्रा को कर सकते है।
इस आसान को कैसे करे
सबसे पहले आप योगा आसान में वज्रासन की मुद्रा में बैठे जाये।
अपने दोनों हाथो को धीरे से सांसे लेते हुए ऊपर उठा कर निचे की और झुंके।
आपके पेट दोनों जांघो के बीच में होंगे।
आपके दोनों हाथ जमीन पर सीधे और सटे होने चाहिए। हाथो के पंजे खुले हो।
पीछे आपके दोनों एड़िया आपसे में सटे हो।
जब आप आगे की और झुकेंगे तब कमर पे थोड़ा स्ट्रेचिंग होगा।
आपके पुरे शरीर में खिचवा महसूस होगा।
शुरुआत में आप धीरे-धीरे इसका अभ्यास करे।
जब भी आप निचे की और झुके तब आप कम से कम 2,3 सेकंड तक होल्ड करके रखे।
इस असानो को लगभग आप 3,4 बार दोहराये।
बालासन किस समय करे
जब भी आप इस आसान को करे आपका पेट खाली होना चाहिए यदि आप शाम के समय इस आसान को करते है तो आपको 3, 4 घंटे पहले ही भोजन लेना होगा। वैसे आप इस आसान को सुबह-सुबह करे तो यह फायदेमंद होगा।
इस आसान को आप 15 से 20 सेकंड कर सकते है। बाद में आप अपनी क्षमता के अनुसार 10 मिनट तक भी कर सकते है।
सावधानिया
यदि आपको कमर दर्द की प्रॉब्लम हो और झुकने में तकलीफ हो तो आप किसी तकिये की मदद से इस आसान को कर सकते है।
घुटनो में दर्द हो तो ये आसान आप ना करे।
यदि आपको पैरो के नसों में दर्द हो, पैर मुड़ने में तकलीफ हो तो आप इस आसान को ना करे।
यदि आप प्रेग्नेंट है तो आप इस आसान का अभ्यास न करे।
आप शीर्षासन करने के बाद आप इस आसान को कर सकते है।
बालासन में एक आराम करने की मुद्रा है। इसे आप किसी भी आसान के बाद कर सकते है।